Rabindranath tagore autobiography in hindi. रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी,नोबेल पुरस्कार।Rabindranath Tagore 2022-10-18

Rabindranath tagore autobiography in hindi Rating: 8,3/10 130 reviews

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन एक अनोखी और अविस्मरणीय था। वह भारत के एक महान कवि, साहित्यकार, नाटककार, संस्कृतिकार और राष्ट्रपिता थे। उनके जीवन का संक्षिप्त वर्णन होने वाला अंतर्गत होता है, इसलिए यह आत्मकथा भी है।

रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता महर्षि दमोहन सिंह टैगोर थे जो एक सुन्दर घर से आये थे। रबीन्द्रनाथ टैगोर को वहाँ पर पढ़ाई मिली और उन्होंने पहले से ही अपना शैलीय संगीत सीखा था। वह अपने जीवन का अधिकांश समय कोलकाता में ही बिताया और वहाँ से ही अपनी साहित्यिक या

Rabindranath Tagore Biography In Hindi

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वर्ष 1871 में रविंद्र नाथ टैगोर के पिता ने इनका एडमिशन लंदन के कानून महाविद्यालय में करवाया. रवींन्द्रनाथ टैगोर मृत्यु Rabindranath Tagore Death रवीन्द्रनाथ टैगोर का निधन 7 अगस्त 1941 को कोलकत्ता में हुआ. वहां पेड़ के नीचे कक्षाएं आयोजित की जाती थी वहां पारंपरिक रूप से गुरु — शिष्य के तरीके का पालन करते हुए शिक्षा प्रदान की जाती थी. वह कनाडा के पश्चिमी तट से हैडा नक्काशी और मैक्स पेचस्टीन के वुडकट्स से भी काफी प्रभावित थे. बिंदु Points जानकारी Information नाम Name रवींन्द्रनाथ टैगोर पिता का नाम Father name देवेंद्र नाथ टैगोर माता का नाम Mother name शारदा देवी जन्म Birth 7 मई 1861 जन्म स्थान Birth Place कोलकाता शिक्षा Education लन्दन लॉ कॉलेज कार्यक्षेत्र Profession कवि पुरस्कार Awards नोबेल पुरस्कार 1913 मुख्य योगदान Major Work राष्ट्रगान के रचियता रविंद्र नाथ टैगोर जन्म और प्रारंभिक शिक्षा Rabindranath Tagore Birth and Initial Life रवीना टैगोर का जन्म 7 मई 1861 में कोलकाता के जोड़ासाँको की हवेली में हुआ था.

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किन्तु उस समय उनके ध्वारा किये गये कार्य बंगाली के साथ — साथ विदेशी पाठकों के बीच अधिक से अधिक लोकप्रिय होने लगे थे. शेक्सपियर के कई कामों को अपने ही तरीके से सीखने की कोशिश करने लगे. रविंद्र नाथ टैगोर का निधन 7 August 1941 के दिन हुआ था। Conclusion — मेरा यह आर्टिकल Rabindranath Tagore Biography बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। लेख के जरिये हमने रवींद्रनाथ टैगोर का शिक्षा दर्शन और rabindranath tagore or thakur से सबंधीत सम्पूर्ण जानकारी दी है। अगर आपको अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है। हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।. उनकी एक भाभी कादंबरी उनके करीबी दोस्त और विश्वासी थी. यहाँ पर एक प्रार्थना कक्ष था जहाँ का फर्श संगमरमर के पत्थरों का बना था. यह भारतीय साहित्य के लिए अभूतपूर्व क्षति थी.

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रबीन्द्रनाथ ठाकुर

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इन्हें बचपन में रवि नाम से जाना जाता था. सन 1920 से 1930 के दशक में उन्होंने दुनिया भर में बड़े पैमाने पर यात्रा की. पूरे भारत में बंगाली संस्कृति और साहित्य पर उनके प्रभावशाली प्रभाव के लिए जाने जाते थे. उस दौरान उन्होंने लेटिन अमेरिका, यूरोप और दक्षिण पूर्व एशिया का दौरा किया. परंतु साहित्य में रुचि होने के कारण 2 वर्ष बाद ही बिना डिग्री प्राप्त किये वे वापस भारत लौट आए.

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Rabindranath Tagore Biography in Hindi: रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय

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जिसकी वजह से उनका पालन पोषण नौकरों द्वारा ही किया गया. अमृतसर के प्रवास के दौरान उन्होंने सिख धर्म को बहुत ही गहराई से अध्ययन किया. में उन्हें राजा जॉर्ज पंचम ने नाइटहुड की पदवी से सम्मानित किया था। १९१९ ई. रबिन्द्रनाथ की प्रारंभिक शिक्षा सेंट जेवियर स्कूल में हुई. वे नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले ही गैर यूरोपीय थे.

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गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर Rabindranath Tagore Biography in Hindi

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एक प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत कवि कालिदास जैसे प्रसिद्ध लेखकों के कार्यों को पढ़ा और जाना. उन्होंने जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में भाषण दिए तथा सम्पूर्ण विश्व का दौरा किया. रविन्द्रनाथ टैगोर ने अपने साहित्यिक परिश्रम से दुनिया के सभी हिस्सों में अपनी विचारधारा को फैलाने का कार्य किया. रविंद्र नाथ टैगोर की मृत्यु 7 August 1941 के दिन हुई थी। 2. इन्होने इस अवसर का उपयोग कर कई विश्व के नेताओं से भारतीयों और अंग्रेजों के बीच के मुद्दों पर चर्चा करने का भी प्रयास किया. जहाँ उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से कई प्रसिद्ध कवियों का ध्यान अपनी ओर खींचा.


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रवीन्द्र नाथ टैगोर की जीवनी

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यीट्स और आंद्रे जीद ने प्रशंसा की और इसके लिए टैगोर को 1913 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। मृत्यु रवीन्द्र नाथ टैगोर ने अपने जीवन के आखिरी 4 साल पीड़ा और बीमारी में बिताये। 1937 के अंत में वो अचेत हो गए और बहुत समय तक इसी अवस्था में रहे। लगभग तीन साल बाद एक बार फिर ऐसा ही हुआ। इस दौरान वह जब कभी भी ठीक होते तो कवितायें लिखते। इस दौरान लिखी गयीं कविताएं उनकी बेहतरीन कविताओं में से एक हैं। लम्बी बीमारी के बाद 7 अगस्त 1941 को कलकता में उनका देहांत हो गया।. रविंद्रनाथ ने अपने साहित्यों के माध्यम से अन्य प्रासंगिक सामाजिक बुराइयों के बीच राष्ट्रवाद के आने वाले खतरों के बारे में बात की. अभिगमन तिथि १२ अप्रैल २०१६. टैगोर जी ने वहां आशा व्यक्त की आधुनिक विधि की तुलना में शिक्षण के लिए प्राचीन विधि में परिवर्तन फायदेमंद साबित हो सकता है. वहां से वे अंग्रेजी, इरिश और स्कॉटिश साहित्य और संगीत के सार को सीखने के बाद भारत वापस लौट आये इसके बारेमेभी जानिए :- रविंद्र नाथ टैगोर का शुरुआती करियर — इनके करियर की बात की जाये तो इन्होने बहुत कम उम्र में ही लिखना शुरू कर दिया था.

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Rabindranath Tagore's birthday is celebrated every year on 7th May as Rabindranath Tagore Jayanti for the unforgettable contribution of Tagore. इसलिए इन्हें घर की आया एवं घर के नौकरों ध्वारा पाला — पोसा गया था. सन 1927 में, उन्होंने दक्षिणपूर्व एशियाई दौरे की शुरुआत की और कई लोगों को अपने ज्ञान और साहित्यिक कार्यों से प्रेरित किया. और उन्होंने सिख धर्म पर कई कविताएं और लेखों को लिखा. अभिगमन तिथि 2 दिसंबर 2017. नई दिल्ली: सरूप एण्ड सन्स.

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रबीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय

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यात्रा में अमृतसर में से उन्होंने सिख धर्म के बारे में जानने के लिए मार्ग प्रशस्त किया, उस अनुभव ने 6 कविताओं और धर्म पर कई लेखों को लिखने में मदद की रविंद्र नाथ टैगोर की शिक्षा — Ravindra Nath Tagore —हालाँकि टैगोर जी की अधिकांश शुरूआती शिक्षा घर पर ही पूरी हुई थी. उनके दुसरे भाई सत्येन्द्र नाथ जी भी एक सम्मानजनक स्थिति में थे. वह बंगाली कवि, ब्रह्म समाज के दार्शनिक, चित्रकार और संगीतकार थे. सन 1912 में वे इंग्लैंड गए, वहां उन्होंने उनके ध्वारा किये गये रचनाओं को विलियम बटलर योर्ट्स, एज्रा पौण्ड, रोबर्ट ब्रिजेस, एर्नेस्ट राईस और थॉमस स्टर्ज मूर के साथ ही उस युग के प्रमुख लेखकों के समक्ष पेश किया. दुर्भाग्यवश, उसी दौरान उनकी पत्नी और उनके दो बच्चे मृत्यु को प्राप्त हो गये, जिससे वे बहुत दुखी हुए.

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