Kabir poems in hindi with meaning. Kabir Das Ke Dohe with Meaning in Hindi 2022-10-11

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Kabir was a 15th-century Indian mystic poet and saint, whose poetry has been revered for centuries for its profound wisdom and spiritual insight. His poems, written in Hindi, have been translated into many languages and continue to be widely read and revered today.

One of the most famous Kabir poems is the "Doha," a form of poetry that consists of a couplet or quatrain. In this poem, Kabir speaks about the illusory nature of the world and the importance of recognizing the divine within oneself. He writes:

"Sach ko jaano, nirgun raakhyo, Naam liyo, shabd suno bakhyo."

This translates to: "Know the truth, hold onto the formless, take the name, listen to the word."

Another famous Kabir poem is the "Pad," a form of poetry that consists of four lines. In this poem, Kabir speaks about the importance of living a life of simplicity and devotion to the divine. He writes:

"Jin rahyo tin paar, Jin paar tin rahyo, Tin paar sab jag upjyo, Tin rahyo sab jag tyago."

This translates to: "Those who live in the path, cross over, those who cross over, live in the path, in crossing over, the entire world is awakened, in living in the path, the entire world is renounced."

Kabir's poetry is filled with wisdom and spiritual insight, and it continues to inspire and guide people on their spiritual journey. His poems are a testament to the timelessness and universality of his teachings, which have the power to transcend language and cultural boundaries.

कबीर

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Targeting this popularity, Srimanta Sankardev of Assam-Bhoomi has written in his book ' Kirtan Ghosha' that saints sing Kabir-versed songs at places like Uresha, Varanasi, etc. What's In This Post? Though Kabir was illiterate, he was not less than a scholar. · When was Kabir Das born? तू क्या गर्व करता है? तू झूठे सुख को सुख कहता है और मन में प्रसन्न होता है? मैं तो तुम्हारे पास ही हूँ! आज हम उनकी कुछ कविताओं को यहाँ पढेगे. The basic religious principles he espouses are simple. He adopted the livelihood of foster father-mother Neeru and Neema.

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कबीर दास के 50 लोकप्रिय दोहे

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He was never formally educated and almost illiterate. It is said that you were born in 1398 from the womb of a widowed Brahmin in Kashi as a result of the blessings of Swami Ramananda. बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि, हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि। Meaning in Hindi कबीर कहते हैं कि वाणी एक अमूल्य रत्न के समान है। इसलिए वह ह्रदय के तराजू में तोलकर अर्थात सोच समझ कर ही उसे मुंह से बाहर आने देना चाहिए. उसकी जगह कोई घर की चक्की की पूजा कोई नहीं करता , जिसमे अन्न पीस कर लोग अपना पेट भरते हैं. Instead, noone worships home flour mill chakki which gives us the flour to eat. माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय । एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय ॥ Meaning in Hindi मिटटी कुम्हार से कहती है कि आज तो तू मुझे पैरों के नीचे रोंद रहा है. Later, Kabir Das Ji is really a great saint, a great devotee and a great become poet.

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‎Kabir ke Dohe with Meaning in Hindi

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Building the Ego takes energy from the body, takes away the bodies composure. Legend says that he was born in 1398 and relinquished his body when he was about 120 years old. This is the story of life - the lovers meeting, separating, the pangs of love and the urge for union and the eventual union. He is unusual in that he is spiritually significant to Hindus, Sikhs, and Muslims alike. कबीर घास न नींदिए , जो पाऊँ तलि होइ। उड़ि पड़ै जब आँखि मैं , खरी दुहेली होई। व्याख्या - यहाँ कबीर जी कहते हैं कि कभी उस घास की निंदा नहीं करनी चाहिए जो हमारे पैरों के तले हो। जब यही घास का तिनका उड़कर जब आँख में पड़ जाता है तो बहुत कष्ट पहुंचाता है। अथार्थ हमें कभी भी अपने नीचे काम करने वाले मजबूर व्यक्ति की निंदा नहीं करनी चाहिए क्या पता कल जब वही व्यक्ति जागृत होगा आपको कितना कष्ट पहुचाये। English Explanation - Kabir ji says that when the grass is under out feet, we must not say anything wrong about it. माला तो कर मैं फिरै, जीभि फिरै मुख माहिं। मनुवाँ तो दहुँदिसि फिरै , यह तौ सुमिरन नाहिं। व्याख्या in Hindi - कबीर जी कहते हैं कि माला तो हाथ में घूमती है। साथ ही साथ जीभ मुख के अंदर प्रभु का नाम लेते हुए घूमती है। परंतु मनुष्य का मन चारों दिशाओं में भटकता रहता है। यह सच्ची भक्ति नहीं है। कहने का भाव है कि मानव मन चंचल है व् बिना इस पर नियंत्रण के सच्ची भक्ति नहीं हो सकती। English Explanation - A person tells rosary in his hands.

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Kabir Das Ke Dohe with Meaning in Hindi

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Otherwise, this article is only for you. बस इतना दीजिये,जिस में उसके परिवार का भरण-पोषण हो जाए. Suggested Articles for You Read Beautiful English Quotes from here. ज्ञान की जागृति को हासिल कर प्रभु का नाम लो।सजग होकर प्रभु का ध्यान करो।वह दिन दूर नहीं जब तुम्हें गहन निद्रा में सो ही जाना है— जब तक जाग सकते हो जागते क्यों नहीं? ये आज भी बहस का मुद्दा हैं, एक जाने मने इतिहासकार के अनुसार कबीर जी का जन्म एक गरीब मुस्लिम जोल्हे के घर में हुआ था। वहीं एक बड़े इतिहास के अनुसार संत कबीर जी के माता और पिता हिन्दू थे, जो धर्म परिवर्तन के बाद मुस्लिम बने थे। और कुछ लोगो के द्वारा ये भी कहा जाता हैं की, संत कबीर दास जी मुसलमान थे. He believed God is one and people just worship Him with different names. Kabir Das was born in 1398. When the blade of the same grass falls into the eye, it can cause much pain.

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Satguru Kabir Mahasabha: One Hundred Poems of Kabir

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तुम मुझे बाहर मंदिर-मस्जिदों में कहाँ ढूंढ़ते फिर रहे हो? Following Kabir means understanding one's inner self, realizing oneself, accepting oneself as is, and becoming harmonious with one's surroundings. He was bold, carefree, self-contented and revolutionary बीजक has three parts namely साखी, सबद और रमैनी. साँई इतना दीजिए जामें कुटुंब समाय । मैं भी भूखा ना रहूँ साधु न भुखा जाय॥ Meaning in Hindi कबीर कहते हैं, कि हे भगवान् मुझे ज्यादा नहीं चाहिए. What is known, is that he was brought up in a family of Muslim weavers. In this blog we are presenting to you Kabir's famous dohe Couplets with Hindi and English Explanation. That means - I am going home.

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संत कबीर के दोहे अर्थ सहित

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धर्मभीरुता छोड़ के अपने मन को बदल. पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ, पंडित भया ना कोय। ढाई आखर प्रेम का , पढ़े तो पंडित होए। व्याख्या - ज्ञान की किताबें पढ़ कर भी लोग मृत्य के आगोश में चले गए व् उनमें से कोई पंडित विद्वान नहीं बना । अगर इंसान प्यार के ढाई अक्षर पढ़ ले अथार्थ अगर वह दूसरों से प्यार करना सीख ले तो वह अपने आप पंडित बन जाता है। Explanation - Reading so many 7. In Sufi tradition it is a reflection of man and God - realization of the separation from God, the pangs of love and urge for union with God, and the eventual joy of union. In 1518, Kabir Das died in Maghar place. पर एक दिन ऐसा आएगा जब तू मेरे नीचे होगा और मैं तेरे ऊपर होउंगी. Kabir says, you spent your life turning the beads of rosary, but could not turn your own heart.

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Kabir Ke Dohe Aisi Vani Boliye Meaning in Hindi

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He named the child Kabir and raised him. भावार्थात सहृदय ही प्रेम भाव को समझता है। निर्मम मन इस भावना को क्या जाने? Kabir ke dohe on Madhur Vani, Good Speech 11. In this way his followers claim him as contemporary to Guru Nanak and Sikander Lodi. Another beauty of Kabir's poetry is that he chooses situations that surround daily lives. हमें उम्मीद हैं की आपको ये हमारा पोस्ट अवश्य ही पसंद आएगा, हम आपको Kabir Ke Dohe से पहले कबीर जी के बारे में छोटी जानकारी देना चाहेंगे। कबीर दास का जीवन काफी कठिनाइयों से भरा हुआ था लेकिन फिर भी उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों को मिटाने के लिए जीवन के अंतिम दिनों तक प्रयत्न किया। संत कबीर दास जी समाज में फैले आडंबर और अंधविश्वास को मिटाने के लिए दोहे और पद की रचना करते थे जिनका सीधा उद्देश्य कुरीतियों पर वार करना था। कबीर जी के दोहे और साथिया आज के युग में भी समान तरीके से लाभदायक है। क्योंकि आज भी समाज में बहुत से आडंबर और अंधविश्वास फैले हैं जिन्हें मिटाना बहुत जरूरी है। आपको हमारे इस आर्टिकल में ना सिर्फ कबीर के दोहे और साखियां पढ़ने को मिलेंगे बल्कि उनकी संपूर्ण व्याख्या भी प्राप्त होगी। और Kabir Ke Dohe के बाद हम आपको इस पोस्ट के अंत में कबीर जी के जीवनी के बारे में छोटा प्रकाश भी डालने की कोशिस की हैं। तो चलिए शुरू करते है,- संत कबीर दास के दोहे हिंदी में Kabir Ke Dohe With Meaning In Hindi. तुम अभी से सावधान क्यों नहीं हो जाते. Kabir used simple, common, slang words - which are sometimes not in use today.

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Kabir das ke dohe in hindi with meaning pdf

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Kabir's verses demonstrate his superior understanding of a wide variety of subject-matters including: - Life - Nature - Time - Self-Motivation - Truth - God - Women - Love - Guru - Ram SUPPORT: We're always excited to hear from you! दुनिया का हर काम धीरे धीरे ही होता है। इसलिए सब्र करो। जैसे माली चाहे कितने भी पानी से बगीचे को सींच ले लेकिन वसंत ऋतू आने पर ही फूल खिलते हैं। दोहा Dohe — माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर । आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर ॥ अर्थ — कबीर दास जी कहते हैं कि माया धन और इंसान का मन कभी नहीं मरा, इंसान मरता है शरीर बदलता है लेकिन इंसान की इच्छा और ईर्ष्या कभी नहीं मरती। दोहा Dohe — मांगन मरण समान है, मत मांगो कोई भीख, मांगन से मरना भला, ये सतगुरु की सीख अर्थ — कबीर दास जी कहते हैं कि मांगना तो मृत्यु के समान है, कभी किसी से भीख मत मांगो। मांगने से भला तो मरना है दोहा Dohe — ज्यों नैनन में पुतली, त्यों मालिक घर माँहि. आवत गारी एक है , उलटत होइ अनेक। कह कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक। व्याख्या - कबीरदास जी कहते हैं कि जब किसी के द्वारा दी गई कोई गाली आती है तो वह अपने आप में एक होती है। लेकिन जब इसी गाली को प्रतिक्रिया स्वरुप लौटाया जाता है तो यह अनेक गालियों का रूप ले लेती है। इसलिए हमें किसी के अभद्र वचनों पर भी बुरी प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। कहने का भाव है कि प्रतिक्रिया में एक गाली भी नहीं देनी चाहिए। अथार्थ बुराई को बुराई से नष्ट नहीं करना चाहिए। English Explanation of Doha - Kabir ji says when somebody abuses others, he receives in myriad. For example, ' Punyah' would not be understood in today's Hindi, Urdu or Punjabi. In speech use such words that your ego is eliminated. Meaning in English Sant Kabir das says that speech is like a priceless jewel.

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