Hindu act in hindi. Hindu Marriage Act, 1955: All you need to know! 2022-10-18

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The economic causes of the American Civil War (1861-1865) were rooted in the differences between the Northern and Southern states. The North, with its industrial and urban centers, had a diversified economy that was driven by manufacturing, trade, and finance. The South, on the other hand, was primarily an agricultural region that relied on slave labor to produce cash crops such as cotton, tobacco, and sugar.

One of the main economic differences between the North and South was the system of labor. The North had a more diverse workforce, with a mix of wage laborers, small farmers, and industrial workers. The South, on the other hand, relied heavily on slave labor to work the fields and plantations. Slaves were considered property, and their value was often measured in terms of how much work they could do.

Another significant economic difference between the North and South was the level of investment in infrastructure. The North had a well-developed system of roads, canals, and railroads, which facilitated trade and commerce. The South, however, had a much less developed infrastructure, which made it difficult to transport goods to market.

The economic differences between the North and South were not just a result of different economic systems, but also reflected deeper cultural and political differences. The North was more industrialized and urbanized, and was generally more supportive of federal government intervention in the economy. The South, on the other hand, was more agrarian and rural, and was generally more skeptical of federal intervention.

The economic differences between the North and South were one of the key factors that led to the Civil War. The North wanted to preserve the Union and end slavery, while the South wanted to maintain its way of life and protect its economic interests. The war ultimately ended with the defeat of the Confederacy and the abolition of slavery, but the economic tensions between the North and South continue to shape American politics and society to this day.

Section 3 of Hindu Marriage Act in Hindi & English

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Dastane on 19 March, 1975 Hirachand Srinivas Managaonkar vs Sunanda on 20 March, 2001 Narayan Ganesh Dastane vs Sucheta Narayan Dastane on 19 March, 1975 Smt. The Cherokee Nation and the Trail of Tears. Short title and extent — 1 This Act may be called the Hindu Marriage Act, 1955. New rules for divorce in India In the Akansha v. The Smriti texts do not differentiate between rules of The Hindus follow Hindu law. Section 2 HMA in Hindi and English Section 2 of HINDU MARRIAGE ACT, 1955 - Application of Act - 1 This Act applies : a to any person who is a Hindu by religion in any of its forms or developments, including a Virashaiva, a Lingayat or a follower of the Brahmo, Prarthana or Arya Samaj; b to any person who is a Buddhist, Jaina or Sikh by religion; and c to any other person domiciled in the territories to which this Act extends who is not a Muslim, Christian, Parsi or Jew by religion, unless it is proved that any such person would not have been governed by the Hindu law or by any custom or usage as part of that law in respect of any of the matters dealt with herein if this Act had not been passed. New York University Press.

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धारा 13A हिन्दू विवाह

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Kallu on 31 March, 1959 - Rajasthan High Court Gopu Peddireddi vs Gopu Tirupathy Reddy on 3 July, 1981 - Andhra High Court Rahmat Ullah And Khatoon Nisa vs State Of U. Grounds of Divorce: Hindu Marriage Act Divorce provisions Section 13 of the Hindu Marriage Act provides the grounds for divorce, and they are stated below. हत्या करने वाला निरर्हित होगा—जो व्यक्ति हत्या करता है या हत्या करने का दुष्प्रेरण करता है वह हत व्यक्ति की सम्पत्ति या ऐसी किसी अन्य सम्पत्ति को, जिसमें उत्तराधिकार को अग्रसर करने के लिए उसने हत्या की थी या हत्या करने का दुष्प्रेरण किया था, विरासत में पाने से निरर्हित होगा। 26. The Act contains provisions setting powers of courts, grounds for ending marriages, nullity decrees, custody issues, etc. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव- 1 इस अधिनियम में अभिव्यक्तत: उपबन्धित के सिवाय- क हिन्दू विधि का कोई ऐसा शास्त्र-वाक्य, नियम या निर्वचन या उस विधि की भागरूप कोई भी रूढ़ि या प्रथा, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के अव्यवहित पूर्व प्रवृत्त रही हो, ऐसे किसी भी विषय के बारे में, जिसके लिए इस अधिनियम में उपबन्ध किया गया है, प्रभावहीन हो जाएगी ; ख इस अधिनियम के प्रारम्भ के अव्यवहित पूर्व प्रवृत्त किसी भी अन्य विधि का हिन्दुओं को लागू होना वहां तक बन्द हो जाएगा जहां तक कि वह इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट उपबन्धों में से किसी से भी असंगत हो। अध्याय 2 निर्वसीयती उत्तराधिकार साधारण 5. Who is a Hindu? In India, people belonging to different religions and castes live together.

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Section 23 of Hindu Marriage Act in Hindi & English

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अनुसूची के वर्ग 2 में के वारिसों में सम्पत्ति का वितरण- अनुसूची के वर्ग 2 में किसी एक प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट वारिसों के बीच निर्वसीयत की सम्पत्ति ऐसे विभाजित की जाएगी कि उन्हें बराबर अंश मिले। 12. Retrieved 10 November 2022. Retrieved 10 November 2022. But, the codified and uncodified law does not apply to scheduled tribes as their tribal customs govern them. Divorce In India In the ancient period, marriage was considered sacred and an insoluble union of two persons. अंबेडकर ने अलग निर्वाचकमंडल के प्रावधान को दलितों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व पाने की एकमात्र आशा समझा । लेकिन गांधी हालांकि अलग प्रतिनिधिमंडल के विरोधी थे पर आरक्षित सीटों के विचार के विरुद्ध नहीं थे और अंतत: अंबेडकर ने भी उसे स्वीकार कर लिया, क्योंकि दलित वर्गो के लिए आरक्षित सीटों की प्रस्तावित संख्या बढ़ा दी गई और ऐसे वर्गो के लिए समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए चुनाव की एक द्विस्तरीय व्यवस्था की सिफारिश की गई । यही सितंबर 1932 के पूना समझौते पूना पैक्ट का आधार बना, जिसे बाद में सरकार ने भी स्वीकार कर लिया । नवंबर-दिसंबर 1932 का तीसरा गोलमेज सम्मेलन काफ़ी हद तक औपचारिक और महत्त्वहीन ही रहा, क्योंकि 112 प्रतिनिधियों में केवल 46 ने उसमें भाग लिया । मार्च 1933 में एक श्वेतपत्र ने भारतीय जनमत से केवल सलाह-मशवरे का प्रावधान करके एक संसदीय संयुक्त प्रवर समिति का गठन किया । इसलिए भारत सरकार अधिनियम जिसने अंतत 1935 में मूख्य रूप लिया किसी को भी संतुष्ट न कर सका । कांग्रेस ने भी उसकी आलोचना की और मुस्लिम लीग ने भी । प्रांतों में 1935 के कानून ने द्वैधशासन की जगह सभी विभागों में उत्तरदायी शासन की व्यवस्था की । लेकिन विधायिकाओं के सत्र बुलाने विधेयकों पर सहमति देने और आदिवासी क्षेत्रों का प्रशासन चलाने के विषय में गवर्नरों को व्यापक विवेकाधीन शक्तियाँ देकर उसे संतुलित कर दिया गया । गवर्नरों को अल्पसंख्यकों के अधिकारों, सिविल कर्मचारियों के विशेषाधिकारों और अंग्रेजों के व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए भी विशेष शक्तियाँ दी गई थीं । अंतिम बात यह कि एक विशेष प्रावधान के तहत वे अनिश्चितकाल के लिए किसी प्रति का प्रशासन अपने हाथ में ले सकते थे । केंद्र में इस कानून ने एक संघीय ढाँचे की व्यवस्था की लेकिन वह तभी लागू होती जबकि 50 प्रतिशत से अधिक रजवाड़े एक ऐसे विलयपत्र पर हस्ताक्षर करके औपचारिक रूप से उसे स्वीकार कर लेते जो ब्रिटिश सम्राट के साथ उनकी पहले की सभी साधेयों को रह कर देता । इस कानून ने केंद्र में द्वैधशासन की व्यवस्था की पर कुछ सुरक्षा उपायों के साथ और विदेशी मामले प्रतिरक्षा और आंतरिक सुरक्षा जैसे विभाग पूरी तरह वायसरॉय के नियंत्रण में होते । भारत सरकार की वित्तीय स्वतंत्रता की पुरानी माँग के जवाब में वित्तीय नियंत्रण का लंदन से नई दिल्ली को हस्तांतरण इस कानून की एक और विशेषता था । निर्वाचकमंडल को बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया लेंकिन सपत्ति संबंधी भारी अर्हताओं ने भारतीय जनता के 10 प्रतिशत भाग को मताधिकार से वंचित कर दिया । ग्रामीण भारत में इसने धनी और मझोले किसानों को मताधिकार दिया जिनको कांग्रेस की राजनीति का प्रमुख आधार माना जाता था । इसलिए डी. The modern Hindu law has undergone many alterations by judicial interpretations and legislative modifications.

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Indian Removal Act

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According to the Act, divorce means dissolution of the marriage. रोग, त्रुटि आदि से निरर्हता न होगी— कोई व्यक्ति किसी सम्पत्ति का उत्तराधिकार पाने से किसी रोग, त्रुटि या अंगविकार के आधार पर या इस नियम में यथा उपबन्धित को छोड़कर किसी भी अन्य आधार पर, चाहे वह कोई क्यों न हो, निरहित न होगा। राजगामित्व 29. The Hindu Marriage Act got enacted to guard the rights of marriage between Hindu bride and groom bound together under the sacred bond of marriage. दो या अधिक वारिसों के उत्तराधिकार का ढंग—यदि दो या अधिक वारिस निवर्ससीयत की सम्पत्ति के एक साथ उत्तराधिकारी होते हैं तो वे सम्पत्ति को निम्नलिखित प्रकार से पाएंगे- क इस अधिनियम में अभिव्यक्त तौर पर अन्यथा उपबन्धित के सिवाय व्यक्तिवार, न कि शाखावार आधार पर लेंगे; और ख सामान्यिक अभिधारियों की हैसियत में न कि संयुक्त अभिधारियों की हैसियत में लेंगे। 20. The University of Georgia Press.

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Hindu Marriage Act, 1955: All you need to know!

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द्विविवाह के लिए दंड-यदि इस अधिनियम के प्रारंभ के पश्चात् दो हिन्दुओं के बीच अनुष्ठापित किसी विवाह की तारीख पर ऐसे विवाह के किसी पक्षकार का पति या पत्नी जीवित था या थी तो ऐसा विवाह शून्य होगा और भारतीय दंड संहिता 1860 का 45 की धारा 494 और 495 के उपबन्ध उसे तदनुसार लागू होंगे । 18. For example, X gets converted into another religion for marrying C. The child born after marriage is legitimate, and the father has to protect and bring up the children. Longmans, Green and Co. Adultery is the consensual and voluntary intercourse between a married person and another married or unmarried person of the opposite sex. Marigowda vs Smt Lakshmamma on 29 January, 2013 - Karnataka High Court Anupama Misra vs Bhagaban Misra on 1 November, 1971 - Orissa High Court Muraleedharan Raghavan vs Asha Divakaran on 3 January, 2008 - Kerala High Court Smt.

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Hindu Marriage Act 1955 (Hindi) हिन्दू विवाह अधिनियम

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इस अधिनियम के अधीन अर्जियों के विचारण और निपटारे से सम्बन्धित विशेष उपबन्ध- 1 इस अधिनियम के अधीन अर्जी का विचारण, जहां तक कि न्याय के हित से संगत रहते हुए उस विचारण के बारे से साध्य हो, दिन प्रतिदिन तब तक निरन्तर चालू रहेगा जब तक कि वह समाप्त न हो जाए किन्तु उस दशा में नहीं जिसमें न्यायालय विचारण का अगले दिन से परे के लिए स्थगन उन कारणों से आवश्यक समझे जो लेखबद्ध किए जाएंगे । 2 इस अधिनियम के अधीन हर अर्जी का विचारण जहां तक संभव हो शीघ्र किया जाएगा और प्रत्यर्थी पर अर्जी की सूचना की तामील होने की तारीख से छह मास के अन्दर विचारण समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा । 3 इस अधिनियम के अधीन हर अपील की सुनवाई जहां तक संभव हो शीघ्र की जाएगी और प्रत्यर्थी पर अपील की सूचना की तामील होने की तारीख से तीन मास के अंदर सुनवाई समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा । 21 ग. The act applies to any person who is a Buddhist, Jaina or Sikh by religion. पिता का भाई, पिता की बहिन । VIII. माता का पिता, माता की माता। IX. Guilford, CN: Lyons Press. पिता की विधवा, भाई की विधवा । VII. For what period does the Vice President of India hold office? Retrieved May 12, 2011.

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भारत सरकार अधिनियम, 1935

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D on 30 June, 1947 Jeet Singh And Ors. B, wife of X can approach the court seeking a remedy for divorce without her consent. पूर्णरक्त को अर्धरक्त पर अधिमान प्राप्त है—निर्वसीयत से पूर्णरक्त सम्बन्ध रखने वाले वारिसों को अर्धरक्त सम्बन्ध रखने वाले वारिसों पर अधिमान प्राप्त होगा यदि उस सम्बन्ध की प्रकृति सब प्रकार से वही हो । 19. The ancient tradition of gifting daughters through marriages is still practised in our country. Almost president: the men who lost the race but changed the nation. He called his Northern critics hypocrites, given the Humanity has often wept over the fate of the aborigines of this country and According to historian According to Robert M. A single system of the law directs every community.

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हिन्दू विवाह अधिनियम

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Mental torture by a spouse is also cruelty. Section 5 iii of the Hindu Marriage Act 1955 says that the bridegroom shall attain the age of 21, and the bride attains the age of 18 at the time of marriage. Sunila on 17 February, 1983 - Delhi High Court धारा 2 हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 का विवरण - अधिनियम का लागू होना- 1 यह अधिनियम - क वीरशैव, लिंगायत, ब्राह्म, प्रार्थना या आर्य-समाज के अनुयायियों के सहित ऐसे किसी व्यक्ति को लागू है जो कि हिन्दू धर्म के रूपों के विकासों में से किसी के नाते धर्म से हिन्दू हैं; ख ऐसे किसी व्यक्ति को लागू है जो कि धर्म से बौद्ध, जैन या सिक्ख हैं; और ग जब तक कि उन राज्य-क्षेत्रों में जिन पर कि इस अधिनियम का विस्तार है, अधिवासित ऐसे किसी अन्य व्यक्ति के बारे में जो कि धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है, यह सिद्ध नहीं कर दिया जाता कि यदि यह अधिनियम पारित न किया गया होता तो वह ऐसी किसी बात के बारे में, जिसके लिये इसमें व्यवस्था की गई है, हिन्दू विधि द्वारा या उस विधि की भागरूप किसी रूढ़ि या प्रथा द्वारा शासित नहीं होता, ऐसे अन्य व्यक्ति को भी लागू है। स्पष्टीकरण — निम्न व्यक्ति अर्थात् :- क ऐसा कोई बालक चाहे वह औरस हो या जारज जिसके दोनों जनकों में से एक धर्म से हिन्दू, बौद्ध, जैन या सिक्ख हों; ख ऐसा बालक चाहे वह औरस हो या जारज जिसके दोनों जनकों में से एक धर्म से हिन्दू, बौद्ध, जैन या सिक्ख है और जिसका कि लालन-पालन उस आदिम जाति, समुदाय, समूह या परिवार के सदस्य के रूप में किया गया है जिसका कि ऐसा जनक है या था; और ग ऐसा कोई व्यक्ति जिसने हिन्दू, बौद्ध, जैन या सिक्ख धर्म ग्रहण किया है, पुनर्ग्रहण किया है; यथास्थिति धर्म से हिन्दू, बौद्ध, जैन या सिक्ख है। 2 उपधारा 1 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई बात संविधान के अनुच्छेद 366 के खण्ड 25 के अर्थों के अन्दर वाली किसी अनुसूचित आदिम जाति के सदस्यों को तब तक लागू न होगी जब तक कि केन्द्रीय सरकार राजकीय गजट में अधिसूचना द्वारा अन्यथा निर्दिष्ट न करे। 3 इस अधिनियम के किसी प्रभाव से हिन्दू पद का ऐसे अर्थ लगाया जायगा मानो कि इसके अन्तर्गत ऐसा व्यक्ति है जो कि यद्यपि धर्म से हिन्दू नहीं है तथापि ऐसा व्यक्ति है जिसे कि यह अधिनियम इस धारा में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के बल से लागू होता है।. तरवाड, तावषि, कुटुम्ब, कवर या इल्लम् की सम्पत्ति में हित का न्यागमन- 1 जबकि कोई हिन्दू जिसे यदि यह अधिनियम पारित न किया गया होता तो मरुमक्कतायम् या नंबुदिरी विधि लागू होती इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् अपनी मृत्यु के समय, यथास्थिति, तरवाड, तावषि या इस्लम् की सम्पत्ति में हित रखते हुए मरे तब सम्पत्ति में उसका हित इस अधिनियम के अधीन, यथास्थिति, वसीयती या निर्वसीयती उत्तराधिकार द्वारा न्यागत होगा, मरुमक्कतायम् या नंबुदिरी विधि के अनुसार नहीं। स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए तरवाड, तावषि या इल्लम की सम्पत्ति में हिन्दु का हित, यथास्थिति, तरवाड, तावषि या इल्लम् की सम्पत्ति में वह अंश समझा जाएगा जो उसे मिलता यदि उसकी अपनी मृत्यु के अव्यवहित पूर्व, यथास्थिति, तरवाड़, तावषि या इल्लम् के उस समय जीवित सब सदस्यों में उस सम्पत्ति का विभाजन व्यक्तिवार हुआ होता, चाहे वह अपने को लागू मरुमक्कातायम् या नंबुदिरी विधि के अधीन ऐसे विभाजन का दावा करने का हकदार था या नहीं तथा ऐसा अंश उसे बांट में आत्यंकित: दिया गया समझा जाएगा। 2 जबकि कोई हिन्दू, जिसे यदि यह अधिनियम पारित न किया गया होता तो अलियसन्तान विधि लागू होती इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् अपनी मृत्यु के समय, यथास्थिति, कुटुम्ब या कवरू की सम्पत्ति में अविभक्त हित रखते हुए मरे तब सम्पत्ति में उसका अपना हित इस अधिनियम के अधीन, यथास्थिति, वसीयती या निर्वसीयती उत्तराधिकार द्वारा न्यागत होगा, अलियसन्तान विधि के अनुसार नहीं। स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए कुटुम्ब या कवर की सम्पत्ति में हिन्दू का हित, यथास्थिति, कुटुम्ब या कवरु की सम्पत्ति में अंश समझा जाएगा जो उसे मिलता यदि उसकी अपनी मृत्यु के अव्यवहित पूर्व, यथास्थिति, कुटुम्ब या कवरु के उस समय जीवित सब सदस्यों में उस सम्पत्ति का विभाजन व्यक्तिवार हुआ होता, चाहे वह अलियसन्तान विधि के अधीन ऐसे विभाजन का दावा करने का हकदार था या नहीं तथा ऐसा अंश उसे बांट में आत्यंतिकतः दे दिया गया समझा जाएगा। 3 उपधारा 1 में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जबकि इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् कोई स्थानम्दार मरे तब उसके द्वारा धारित स्थानम् सम्पत्ति उस कुटुम्ब के सदस्यों को जिसका वह स्थानम्दार है और स्थानम्दार के वारिसों को ऐसे न्यागत होगी मानो स्थानम् समत्ति स्थानम्दार और उसके उस समय जीवित कुटुम्ब के सब सदस्यों के बीच स्थानम्दार की मृत्यु के अव्यवहित पूर्व व्यक्तिवार तौर पर विभाजित कर दी गई थी और स्थानम्दार के कुटुम्ब के सदस्यों और स्थानम्दार के वारिसों को जो अंश मिले उन्हें वे अपनी पृथक् सम्पत्ति के तौर पर धारित करेंगे। स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए स्थानम्दार के कुटुम्ब के अंतर्गत उस कुटुम्ब को, चाहे विभक्त हो या अविभक्त, हर वह शाखा आएगी जिसके पुरुष सदस्य यदि अधिनियम पारित न किया गया होता तो किसी रूढ़ि या प्रथा के आधार पर स्थानम्दार के पद पर उत्तरवर्ती होने के हकदार होते। 8. Sridharan vs The Presiding Officer on 18 August, 2008 - Madras High Court Mr. अनुसूची के वर्ग 1 में के वारिसों में सम्पत्ति का वितरण- निर्वसीयत की संपत्ति अनुसूची के वर्ग 1 में के वारिसों में निम्नलिखित नियमों के अनुसार विभाजित की जाएगी- नियम 1—निर्वसीयत की विधवा को या यदि एक से अधिक विधवाएं हों तो सब विधवाओं को मिलाकर एक अंश मिलेगा। नियम 2—निर्वसीयत के उत्तरजीवी पुत्रों और पुत्रियों और माता हर एक को एक-एक अंश मिलेगा। नियम 3—निर्वसीयत के हर एक पूर्व मृत पुत्र की या हर एक पूर्व मृत पुत्री की शाखा में के सब वारिसों को मिलाकर एक अंश मिलेगा। नियम 4—नियम 3 में निर्दिष्ट अंश का वितरण — i पूर्व मृत पुत्र की शाखा में के वारिसों के बीच ऐसे किया जाएगा कि उसकी अपनी विधवा को या सब विधवाओं को मिलाकर और उत्तरजीवी पुत्रों और पुत्रियों को बराबर भाग प्राप्त हों, और उसके पूर्व मृत पुत्री की शाखा को वही भाग प्राप्त हो। ii पूर्व मृत पुत्री की शाखा में के वारिसों के बीच ऐसे किया जाएगा कि उत्तजीवी पुत्रों और पुत्रियों को बराबर भाग प्राप्त हो । 11. Andrew Jackson sought to renew a policy of political and military action for the removal of the Natives from these lands and worked toward enacting a law for "Indian removal".

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Section 2 of Hindu Marriage Act in Hindi & English

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डिग्रियों की संगणना— 1 गोत्रजों या बन्धुओं के बीच उत्तराधिकार क्रम के अवधारण के प्रयोजन के लिए निर्वसीयत से, यथास्थिति, उपरली डिग्री या निचली डिग्री या दोनों के अनुसार के वारिस के सम्बन्ध की संगणना की जाएगी। 2 उपरली डिग्री और निचली डिग्री की संगणना निर्वसीयत को गिनते हुए की जाएगी। 3 हर पीढ़ी एक डिग्री गठित करती है चाहे उपरली चाहे निचली। 14. Congress and the Emergence of Sectionalism. It is also necessary for the person to give valid consent to marriage. Retrieved February 20, 2012. Marriages in India get solemnised according to traditions and cultures. Many Americans during this time favored its passage, but there was also significant opposition.

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Hindu Succession Act 1956 in Hindi

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कुछ मामलों में अर्जियों को अन्तरित करने की शक्ति- 1 जहां- क इस अधिनियम के अधीन कोई अर्जी अधिकारिता रखने वाले जिला न्यायालय में विवाह के किसी पक्षकार द्वारा धारा 10 के अधीन न्यायिक पृथक्करण की डिक्री के लिए या धारा 13 के अधीन विवाह-विच्छेद की डिक्री के लिए प्रार्थना करते हुए पेश की गई है; और ख उसके पश्चात् इस अधिनियम के अधीन कोई दूसरी अर्जी विवाह के दूसरे पक्षकार द्वारा किसी आधार पर धारा 10 के अधीन न्यायिक पृथक्करण की डिक्री के लिए या धारा 13 के अधीन विवाह-विच्छेद की डिक्री के लिए प्रार्थना करते हुए, चाहे उसी जिला न्यायालय में अथवा उसी राज्य के या किसी भिन्न राज्य के किसी भिन्न जिला न्यायालय में पेश की गई है, वहां ऐसी अर्जियों के संबंध में उपधारा 2 में विनिर्दिष्ट रीति से कार्यवाही की जाएगी । 2 ऐसे मामले में जिसे उपधारा 1 लागू होती है, - क यदि ऐसी अर्जियां एक ही जिला न्यायालय में पेश की जाती हैं तो दोनों अर्जियों का विचार और उनकी सुनवाई उस जिला न्यायालय द्वारा एक साथ की जाएगी; ख यदि ऐसी अर्जियां भिन्न-भिन्न जिला न्यायालयों में पेश की जाती हैं तो बाद वाली पेश की गई अर्जी उस जिला न्यायालय को अन्तरित की जाएगी जिसमें पहले वाली अर्जी पेश की गई थी, और दोनों अर्जियों की सुनवाई और उनाका निपटारा उस जिला न्यायालय द्वारा एक साथ किया जाएगा जिसमें पहले वाली अर्जी पेश की गई थी । 3 ऐसे मामले में, जिसे उपधारा 2 का खंड ख लागू होता है, यथास्थिति, वह न्यायालय या सरकार, जो किसी वाद या कार्यवाही को उस जिला न्यायालय से, जिसमें बाद वाली अर्जी पेश की गई है, उच्च न्यायालय को जिसमें पहले वाली अर्जी लम्बित है, अन्तरित करने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 1908 का 5 के अधीन सक्षम है, ऐसी वाद वाली अर्जी का अन्तरण करने के लिए अपनी शक्तियों का वैसे ही प्रयोग करेगी मानो वह उक्त संहिता के अधीन ऐसा करने के लिए सशक्त की गई है । 21 ख. Retrieved March 21, 2014. When two persons have a common ancestor, they are called Sapindas. According to section 14, they have to wait one year after marriage to file the petition. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव-इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय- क हिंदू विधि का कोई ऐसा शास्त्रवाक्य, नियम या निर्वचन या उस विधि की भागरूप कोई भी रूढ़ि या प्रथा जो इस अधिनियम के प्रारंभ के अव्यवहित पूर्व प्रवृत्त रही हो ऐसे किसी भी विषय के बारे में, जिसके लिए इस अधिनियम में उपबन्ध किया गया है, प्रभावहीन हो जाएगी; ख इस अधिनियम के प्रारंभ के अव्यवहित पूर्व प्रवृत्त कोई भी अन्य विधि, वहां तक प्रभावहीन हो जाएगी जहां तक कि वह इस अधिनियम में अंतर्विष्ट उपबंधों में से किसी से भी असंगत हो । हिन्दू विवाह 5. But it is not the fundamental Hindu law that applies to Hindus in India and is an altered and modified law that has altered a substantial portion. The American Journal of Legal History.

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