Ganga nadi ki atmakatha essay in hindi. Translate ganga nadi ki atmakatha essay in Hindi 2022-11-02

Ganga nadi ki atmakatha essay in hindi Rating: 9,6/10 925 reviews

गंगा नदी एक प्रसिद्ध नदी है जो भारत में है। यह नदी भारत के उत्तर भाग से शुरू होती है और बंगाल में समाप्त होती है। गंगा नदी भारत की सबसे प्रमुख नदियों में से एक है और यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है।

गंगा नदी की आत्मकथा काफी अधिकांश लोगों को नहीं पता होती है क्योंकि यह नदी अपनी स्थापना से बहुत पुरानी है। हालांकि, गंगा नदी का उदय हमारे पुराने धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है। ग्रंथों में यह बताया गया है कि गंगा नदी को स्वर्ग से निकाला गया था और यह भारत में अपने स्थापना के लिए आई थी।

गंगा नदी

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अभिगमन तिथि ३ जून २०१५. ताकि उनसे खेती-बाड़ी को सींचा जा सके। उस पानी का अन्य प्रकार से भी उपयोग सम्भव हो सके। जो हो, इस तरह अनेक स्थानो से गजरती, अनेक बाधाओं को पार करती हुई मैं निरन्तर आगे-ही-आगे बढ़ती चली गईं। आपने मुझे रोक कर मेरी कहानी सुननी चाही, सो मैंने चलते-चलते सुना दी। अब मैं अपने प्रियतम सागर से मिलकर उसी में लीन होने जा रही हैं। मैंने अपने आस-पास कई बार कई तरह की घटनाएँ भी घटते देखी हैं । सैनिकों की टोलियों, सेनापतियों, राजाओं, महाराजाओं, राजनेताओं, दंगाइयों, धर्मदूतों आदि को मैंने इन पुलों से गुजरते हुए देखा। धर्मसंस्कृतियों के स्वरूप बनते बिगड़ते, उन्हें आगे बढ़ते या घटते हुए भी देखा । राज्य परिवर्तित होते हुए देखा है। पुरानी बस्तियाँ ढहते और नई बस्तियाँ बसते हुए भी देखी हैं। सभी कुछ धीरज से सुना और सहा है। मै आप सब से भी यही कहकर आगे बढ़ जाना चाहती हूँ। चाहती हूँ कि तुम लोग भी हर कदम पर आने वाली विघ्न-बाधाओं को पार करते लगातार मेरी ही तरह आगे-ही-आगे तब तक चलते-बढ़ते रहो कि जब तक अपना अन्तिम लक्ष्य न पा लो।. . . . River pebbles stones factory project as a raw material, must carefully study the. .

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Autobiography of River Ganga in Hindi Essay गंगा नदी की आत्मकथा पर निबंध

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Sushila Nair Ways by which we can save ganga ᐅ Every city will have to set up Sewage Treatment Plants STP to treat its sewage before releasing it into the river or its tributaries. If you want to get more detailed product information and prices, Zenith. मैं जब बहना चालू करती हूं तब मैं बहुत कम स्थान घेरती हूँ. फिर मेरी जन्म कथा सुनो। मैं दूर से पहाड़ देख सकता था। कई मोड़ लेने के बाद मैं चट्टानों और खाइयों से अपना रास्ता बनाकर यहां पहुंचा। यहाँ से मैं अभी भी बह रहा हूँ। रास्ते में मुझे कई छोटी-बड़ी धाराएँ मिलीं और मेरा किरदार बहुत बड़ा हो गया। ऐसी ही एक नदी है आई. इस समय मैं बहुत खुश रहती हूं.

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Free Essays on Nadi Ki Aatmakatha In Hindi Ganga River through

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Some historians believe that if it was not for the Metis that. यह भी पढ़ें — हम आशा करते है कि हमारे द्वारा Nadi ki Atmakatha Essay in Hindi आपको पसंद आया होगा। अगर यह लेख आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर करना ना भूले। इसके बारे में अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं।. Answer: Save ganga Ganges River, Hindi Ganga, great river of the plains of the northern Indian subcontinent. . अभिगमन तिथि जून १४ २००९. No part of this book may be reproduced or transmitted in any form or by any means without.

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गंगा नदी की आत्मकथा पर निबंध ganga ki atmakatha essay in hindi

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बहिन दिवाऊँ राइ की। थारा ब्याह कराबुं गंग नइ पारि। ग. मुझमें कहीं जल अधिक होता है तो कहीं कम होता है वर्षा के मौसम में मुझ में अधिक पानी होता है और मैं उस समय बहुत तेजी से बहती हूं. नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद. They Are Crises-Crossed In Whole Bangladesh. लेकिन जैसे-जैसे मैं मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़ती हूं वैसे-वैसे मेरा आकार भी बड़ा होता जाता है और मैदानी क्षेत्रों में पहुंचने के बाद मेरा आकार इतना बड़ा हो जाता है कि मेरे एक तट से दूसरे तट पर जाने के लिए नाव या पुल का सहारा लेना पड़ता है. . मैं बहती हुई अंत में समुंदर में जा कर मिल जाती हूं.

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नदी की आत्मकथा पर निबंध Nadi ki atmakatha essay in hindi

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नहीं। मैं आप लोगों से कहना चाहती हूं कि हमारे भारत की संस्कृति में मुझे सबसे पवित्र नदी माना गया है तो आप मुझे गंदा क्यों करते हो । आप सभी लोग आगे बढ़कर मेरे सफाई अभियान में योगदान दो । आप सभी के योगदान से ही मैं साफ स्वच्छ हो पाऊंगी । मेरी नदी के आसपास पेड़ पौधे लगाओ और आसपास की साफ सफाई में अपना योगदान दो । तब मुझे बड़ी खुशी होगी और मैं आपको शुद्ध जल दे पाऊंगी । आप उस जल को पीकर अपनी प्यास बुझाओ और मेरे पानी के माध्यम से आप अच्छी अच्छी फसल की पैदावार करो । आप मेरे पानी का उपयोग अपने जीवन में करो । मैं कई वर्षों से आप लोगों को अपना पानी दे रही हूं तो आप लोगों का कर्तव्य बनता है कि आप मुझे साफ रखे, मुझे दूषित न करे। मेरे तट पर किसी तरह का कोई केमिकल का उपयोग मत करो तब जाकर मुझे खुशी होगी । मैं गंगा नदी हूं मैंने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा है । मैंने हमेशा लोगों की मदद की है आप लोग मुझे दूषित क्यों कर रहे हो । मैंने आपके जीवन को जल देकर आपकी प्यास बुझाई है तो आप मुझे इस तरह की पीड़ा क्यों पहुंचा रहे हो । मैं सुंदर और स्वच्छ रहना चाहती हूं। आप सभी अपना योगदान दें और मुझे स्वच्छ करें । आज मैं यह सोच कर दुखी हो रही हूं और मेरे नेत्रों से आंसू बह रहे हैं कि मैंने जिन लोगों को जल देकर उनकी प्यास बुझाई है वही लोग मुझे दूषित कर रहे हैं। मैं आपसे कहती हूं कि आप मुझे साफ करने में अपना योगदान दें और किसी तरह का कोई प्रदूषण मेरी नदी के आसपास ना होने दें । तब जाकर मुझे खुशी प्राप्त होगी और मैं पूरी खुशी के साथ नदी में बहती रहूंगी और नीले सुंदर और पवित्र जल की लहरें आपको दिखाती रहूंगी । मुझे धरती पर आप लोगों को जल देने के लिए भेजा गया है । मैं आपको जल देती रहूंगी लेकिन आप लोगों का यह दायित्व बनता है कि आप मुझे दूषित ना करें। मैं ईश्वर के द्वारा यहां पर भेजी गई हूं और मैं कई राज्यों और प्रांतों से होते हुए समुद्र में मिल जाती हूं। आप मेरे पानी का उपयोग अपने दैनिक जीवन में कर सकते हैं । आप जब मेरे जल का उपयोग करते हैं तो उसी समय आप लोगों को यह वादा मुझसे करना चाहिए की आप किसी तरह की कोई गंदगी मेरे आस-पास नहीं फेलाएंगे । दोस्तों यह लेख ganga ki atmakatha essay in hindi आपको पसंद आए तो शेयर जरूर करें धन्यवाद।. I was generated from the Himalayas — thousands of years ago. For most of its course it is a wide and sluggish stream, flowing through one of the most fertile and densely populated regions in the world. . लेकिन मनुष्य को यह कब पता चलेगा हमारे खिलाफ अन्याय और अत्याचार कब रुकेगा? मैं कई सालों तक निरंतर अपने पथ पर बहती रहती हूं लेकिन कभी-कभी धरती में भूकंप आने के कारण कुछ स्थान ऊंचे हो जाते हैं तो मैं भी अपना रास्ता बदल लेती हैं लेकिन यह हजारों सालों में एक बार ही होता है. .

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नदी की आत्मकथा पर निबंध

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मैंने इस पृथ्वी को बदलते देखा है मैंने कई राजाओं को रंक बनते देखा है मैंने कई बड़ी-बड़ी लड़ाईयां देखी है मैंने किसी वीर को इतिहास रचते देखा है. Furthermore, different studies revealed the deteriorating health of the river. अभिगमन तिथि ३ जून २०१५. नदी, नहर, सरि, सरिता, प्रवाहिनी, तटिनी, क्षिप्रा आदि जाने कितने नाम हैं मेरे। सभी नाम मेरे रूप को नहीं, बल्कि गति को ही प्रकट करने वाले हैं। सर-सर सरकती चलती रहने के कारण मुझे सरिता कहा जाता है। सतत प्रवाहमयी होने के कारण मैं प्रवाहिनी हूँ। इसी प्रकार दो तटों अर्थात् किनारों के बीच रहने वाली होने के कारण तटिनी और गति की क्षिप्रता यानि तेजी के कारण क्षिप्रा हूँ। और आम शब्दों में नहर हूँ मैं-जी हाँ, नहर या नदी। कहीं भी पहुँच जाऊँ, वहाँ की धरती, पशु-पक्षी आदि सभी प्राणियों, मनुष्यों और खेत-खलिहानों की प्यास बुझा, उनका ताप हर, ठण्डा और फिर कुछ ही देर में हरा-भरा कर देना मेरा नित्य प्रति का काम है। यह काम करते रहने में ही मेरे जीवन की सफलता एवं सार्थकता है। मैं नदी जो हूँ। मैं नदी हूँ। आज मेरा जो स्वरूप तुम सब को दिखाई दे रहा है, वह हमेशा ही ऐसा नहीं था। कभी मैं किसी सजला हरी और बर्फानी पर्वतशिला की कोख में उसी तरह चुपचाप, अनजान और निर्जीव-सी पड़ी रहती थी, जैसे माता की कोख में किसी जीव का भ्रूण पड़ा रहा करता है। फिर समय आने पर जैसे प्रसव-वेदना से कराह कर नारी एक सन्तान को जन्म दिया करती है, उसी प्रकार पहाड़ी के उस शिलाखण्ड के अन्तराल से एक दिन मेरा जन्म हुआ। जैसे जन्म के बाद उसके रोने से सारा घर-प्रांगण गूंज उठा करता है, उसी प्रकार शिलाखण्ड की गोद से मेरे उतरते ही वह सारी घाटी एक प्रकार के मधुर संगीत से, सरस सुरीली स्वर-लहरी की गूंज से जैसे गा उठी। बस, मुझ में और मानव-सन्तान में अन्तर केवल इतना ही है कि वह जन्म लेने के तत्काल बाद चलने नहीं लगती, जबकि मैंने उसी क्षण चलना आरम्भ कर दिया। चलते हुए आगे-ही-आगे बढ़ती गई। पीछे रह गई धारा के रूप में मानो अपना आँचल फैला कर, उसे मेरी धारा आँचल के साथ बान्ध कर मेरे साथ अपना सम्बन्ध तो बनाए रखा, साथ ही अपने प्रवाह-वेग से मुझे आगे-ही-आगे बढ़ते जाने की प्रेरणा और उत्साह भी बंधाती रही। मैं सरिता हूँ न, सो सर-सर सरकती ही गई। मेरे जन्म के साथी वे पहाडी शिलाखण्ड, इधर-उधर बिखरे पत्थर, इधर-उधर की वनस्पतियाँ, अखुए, पेड़-पौधे आदि मेरे हाथ, मेरे पैर, मेरे आँचल को पकड़-थाम मेरी राह रोकने का प्रयास करने लगे, पर मैं कहाँ रुकने वाली थी। नहीं रुकी। कई बार किसी बड़े शिलाखण्ड ने आगे आ कर मेरा पथ रोकने की कोशिश की। तब मेरी कृष-काया रुकती-डुबती हुई-सी प्रतीत हुई, पर कुछ ही देर में मेरे भीतर जाने कहाँ से उत्साह भर आता कि अपने तन को संचित और शक्ति को उभार कर फिर आगे बढ़ आती। इसी प्रकार कई बार राह में आ कर कोई गड्ढा, कोई खाई मुझे अंक में भर कर वहीं बैठी और मुझे बिठाए रखना चाहती; पर मैं उसकी बाँहों की गर्मी में कुछ क्षण तो सुख का अनुभव करती, फिर जैसे ऊब एवं घुटन का अनुभव करते हुए मैं उछल कर निकली और फिर आगे चलने लगी। कई बार ऐसा भी हुआ कि जैसे अकेली जाती छरहरी युवती को निहार मनचले छोकरे उस से छेड़खानी करने लगते हैं, उसी प्रकार घने-जंगलों में से गुजरते हुए अपनी लम्बी डालियाँ रूपी बाहें फैला कर राह में आने वाले वृक्ष मुझ नदी से छेड़-छाड़ करने लगते । अपनी सर्रसर्राह रूप में मैं उन पर गुर्राती हुई आगे बढ़ती गई। इस प्रकार पहाड़ों, जंगलों को पार करते हुए मैं मैदानी इलाके में आ पहुँची। जहाँ से भी गुजरती, वहाँ मेरे आस-पास किनारे बना दिए जाने लगे। पटरियाँ भी बनने लगीं। मेरे कदम निरन्तर आगे बढ़ते गए, निरन्तर मेरा पाट फैलता गया। उस पर वैसे ही किनारे, पटरियाँ, पुश्ते आदि बनाए जाते रहे। यहाँ तक मेरे तटों के आस-पास छोटी-बड़ी बस्तियाँ आबाद होती गई। गाँव बसे। मेरे पानी से सींचा जाकर वहाँ खेती-बाड़ी भी होने लगी। जगह-जगह सुविधा के लिए लोगों ने मुझ पर छोटे-बड़े पुल बना लिए। कई स्थानों से मुझे काट कर छोटे नाले भी बना लिए. मैं जहां से भी बैठी हूं उसके आसपास इंसानी बस्तियां और जंगली जीव जंतु अपना घर बना लेते हैं क्योंकि मेरे जैसे ही उनका जीवन चलता है.

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Nadi ki Atmakatha Essay in Hindi

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. मैं बहती हुई जिस भी क्षेत्र से गुजरती हूं वहां की भूमि को हरा-भरा कर देती हूं वहां पर सुख और शांति ला देती हूं. अभिगमन तिथि ३ जून २०१५. कुछ लोग मुझे देवी की समान पूजते है यह देख कर मुझे बहुत अच्छा लगता है लेकिन जब वे ही लोग मुझ में गंदगी फैलाते हैं तो मुझे बहुत ही बुरा लगता है क्योंकि मेरे जल में कई और प्राणी भी अपना जीवन जीते हैं और गंदगी फैलने के कारण मेरा जल प्रदूषित हो जाता है जिस कारण मुझमें समाए हुए प्राणी जैसे मछली, कछुए, मगरमच्छ आदि का जीवन संकट में पड़ जाता है. अभिगमन तिथि २२ जून २००९. . Nadi ki atmakatha essay in hindi Nadi ki atmakatha nibandh in hindi-हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा निबंध नदी की आत्मकथा पर है जो कि आपके लिए बहुत ही मददगार साबित होगा कोई भी स्टूडेंट हमारे लिखित इस निबंध का उपयोग अपने स्कूल कॉलेज की परीक्षा में लिखने के लिए अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए कर सकते हैं हमारे आज के निबंध नदी की आत्मकथा पर आधारित है जो कि एक काल्पनिक है तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के इस निबंध को.

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. आप मुझे उपयोग में लाओ, मुझे गंदा मत करो। जब मैं नदी में बहती हूं तो कितनी सुंदर दिखाई देती हूं । मेरा पानी कभी नीला दिखाई देता है तो कभी चमकीला दिखाई देता है । मेरे पानी की जो लहरें हैं कितनी सुंदर दिखाई देती है । यदि आप मुझे गंदा करोगे , मेरे तट पर प्रदूषण फैलाओ गे तो क्या आपको यह चमक दिखाई देगी? यह देख कर मुझे बहुत कष्ट होता है लेकिन फिर भी मैं निरंतर बहती रहती हूं. मैं बहती हुई कई गांव कई शहरों से गुजरती हूं मैं जब गांव से गुजरती हूं तो वहां के लोग मुझे आदर पूर्वक प्रणाम करते है यह देख कर मुझे बहुत अच्छा लगता है और वह मुझ में से छोटी-छोटी नहरे निकालकर अपने खेतों में ले जाते है और फसलों को पानी देते है मेरे जल से उनकी फसलें लहरा उठती है और किसानों के चेहरे पर एक अलग ही खुशी आ जाती है. . पहाड़ों से बाहर निकलते समय, मेरा रूप बहुत छोटा होता है, लेकिन जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ती हूं, मैं बड़ी होती जाती हूं और आखिरकार समुद्र में चली जाती हूं। लेकिन समुद्र में शामिल होने से पहले, मैं अपनी आसपास की जमीन को हरा-भरा कर देती हूं। इतना ही नहीं, इसके अलावा भी कई जीव मुझमें पनपते हैं और मुझमें रहते हैं और अपने जीवन का संचालन करते हैं। समुद्र में मिलने से पहले और पहाड़ों से निकलने के बाद मुझे काफी मशक्कत करनी पड़ती है। मेरे सामने कई बाधाएँ आती हैं, लेकिन मैं उन बाधाओं का साहसपूर्वक सामना करके अपना काम पूरा करती हूँ। मेरे अवरोधक पदार्थ छोटे और बड़े कंकड़, पत्थर और चट्टान हैं, लेकिन मैं आसानी से उन्हें पार कर लेती हूं और अपना रास्ता खोज लेती हूं। यदि मेरे उपयोग की गणना की जाती है, तो वह बहुत अधिक है। मेरे नीर का उपयोग बिजली पैदा करने और खेतों की सिंचाई जैसे कृषि कार्य करने के लिए किया जाता है। बिजली इंसानों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है, जिसकी वजह से इंसान इतनी तरक्की कर पाया है। बिजली के कारण आधे से अधिक मानव के कार्य चल रहे हैं। अगर बिजली नहीं होगी तो मानव बहुत ज्यादा पिछड़ जाएगा। मेरे नीर का उपयोग खेतों की सिंचाई के लिए भी किया जाता है जिसके कारण फसलें उगती हैं और चारों तरफ हरियाली होती है। ये फसलें बाद में अनाज देती हैं, जिससे इस सृष्टि के लिए भोजन की व्यवस्था होती हैं। मेरे इतने उपयोगी होने के बावजूद, मानव अभी भी मुझे दूषित करने की कोशिश कर रहा है। कारखानों का दूषित पानी, कचरा और प्लास्टिक मुझमें मनुष्यों द्वारा फेंका जाता है, जो मेरे पानी को दूषित कर रहा है। इसलिए, मैं इंसानों से अनुरोध करना चाहती हूं कि वे मेरे साफ पानी को दूषित न करें और मुझे साफ रखने में अपनी भूमिका निभाएं।.

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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Ganga Ki Atmakatha”, “गंगा की आत्मकथा” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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मेरा जल भगवान की पूजा करने के लिए काम में लिया जाता है मैं अपने आप को खुशनसीब समझती हूं कि भगवान के ऊपर यह जल अर्पण किया जाता है साथ में हर अशुद्ध वस्तु को शुद्ध करने के लिए मेरे ही जल का उपयोग किया जाता है. . With reference to one or more river basins, describe and explain the different impacts of flooding. मैं पर्वत श्रंखलाओं के बीच में से निकलती हुई तरह-तरह की ध्वनी करती हुई तेजी से निकलती हूं और बहती हुई मैदानों की ओर आ जाती हु. यह भी पढ़ें — मैं जब बहना शुरू करती हूं तब मेरे आगे कई कठिनाइयां आती हैं जैसे ऊंचे पहाड़ बड़े-बड़े पेड़-पौधे आदि लेकिन मैं उन सबको काटते हुए निरंतर बहती रहती हूं मैं कभी हार नहीं मानती हूं. .

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