Boat essay in hindi. 10 Lines on Boat in Hindi। नाव पर 10 लाइन वाक्य 2022-10-14

Boat essay in hindi Rating: 7,3/10 1915 reviews

नमस्ते! यहाँ मैंने एक नया निबंध लिखा है जो बट के बारे में है।

बट एक जल्दार होटेल है जो जल पर चलती है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका में पहली बार साझा जलमार्ग पर चलने लगी थी। बट का उपयोग जल मार्गों पर सफर करने, सैंटर मार्गों पर यात्रा करने, जल्दार सेवाओं को साझा करने और जल में मनोरंजन के लिए होता है।

बट में अधिकांशतः सुविधाएं होती हैं जैसे कि खान-पान, बिजली, सुरक्षित स्थान और सुविधाएं जैसे कि ताजगी, स्नान और सफेद जगह। बट में अधिकांशतः एक होटेल जैसी सुविधाएं होती हैं जैसे कि खान-पान, बिजली, सुरक्षित स्

नौका

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. नौकाओं है कि पता चलता है।प्राचीन नाव आमतौर पर एक पेड़ के तने कोकाट कर बनाया जाता था। प्राचीन समय मेंसिंधु घाटी सभ्यता और मेसोपोटामिया के बीच वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए नव कोइस्तेमाल किया गया था। प्रसिद्ध नाविक जैसेकोलंबस, Vasko दा गामा और मैगलन नाव के सहारेमहत्वपूर्ण खोज दुनिया को दिए हैं।. Our mission is to provide an online platform to help students to share essays in Hindi language. नाव मुख्यतः लकड़ी की बनी होती है पर अब लोहे के बड़े बड़े जहाज जिसका वजन 100 टन से भी बहुत अधिक होता है पानी में आसानी से तैरते हैं। Question. जहाजों को यात्री की क्षमता के अनुसार लाइफबोट प्रदान किया जाता है।औसतन एक आधुनिक बड़े जहाज में 18 से 20 लाइफबोट होते हैं जिसकी यात्री क्षमता सौ से डेढ़ सौ प्रति व्यक्ति होती है।. नावोंके तीन प्रकार होते हैं Unpowered या मानव चालित नाव, सेलबोट और मोटरबोट। पहले नौकाविहार अनुभव:इसके पहले मै कभी बोटिंग नहीं किया था। बहुत दिन से मैनौकाविहार के बारे में सोंच रहा था।इसके लिए मैअपने पापा और मम्मी को मनाली थी। इसके लिए हमने दुर्गापुर पश्चिम बंगाल के कुमारमंगलम पार्क को चुन। इसमें नौकाविहार की अच्छी सुविधा है। यह पार्क बेहद खूबसूरत है।और इसका water पूल अंडाकार है , जो की बहुत दर्शनीय है। मै अपने पूरे परिवार के साथ एक नौका में चढ़ गयी।यह नौका मैन्युअल था। अर्थात या motorised नहीं था। इसमें दो सेटपैडल लगा था। एक पैडल पे मैबैठ गयी और एक पर मेरा भाई बैठ गया।साम का समय बहुतसुहाना था।पार्क में हलकी संगीत भी बजाई जाती है। मैऔरमेरा भाई मिलकर प्रोपेलर को चला रहे थे। आधे घंटे के बाद हम थक गए। जब हम पानी में boating कर रहे थे तो हाथ से पानी छूकर बहुत अच्छा लग रहा था। बोटिंग से एक बात का पता चल गया की मैन्युअल बोट में काफी परिश्रम लगता है।लेकिन बहुत आनंद आता है।पानी के बीचोबीच जो मंद हवा बहती है , उसका अनुभव बेहद आनंददायक था। एक बात हम और बताना चाहते हैं की जब भी आप boating किजीये तो अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान दीजिए।नौका में लाइव जैकेट का प्रबंध जरूर हून चाहिए , यदि थोड़ाभी खतरा हो तो। पहली नौका विहार का बहुत अच्छा अनुभव था।लेकिन मेरी अगली महत्वाकांक्षा मोटर नाव पर सवारी करने की थी। इसलिए इसको भी हम लोगो ने पूरा किया अंडमान निकोबार आइलैंड मे।इसका अनुभव नीचे दिया गया है। दूसरा नौकाविहार अनुभव:यह यात्रा बहुत आनंददायक तो नहीं कह सकते हैं।लेकिंन बहुत रोमाँचक बोल सकते हैं। इस यात्रा में मौत जैसी स्थितिऔर रोमांचकारी पल का अनुभव हुआ। यह नौकाविहार जीवन के डरावने पल के आनंद की याद दिलाता है।जिस नाव में हम लोग बैठे थे वह करीब चालीस यात्रियों के लिए बना था। हम सब इसे अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी portblair से पकड़े थे।औरnorthbay island के लिए हम सब जा रहे थे। जिंदगी में कभी समुद्री लहरों से सरोकार नहीं हुआ था , जो यहाँ आकर हुआ। यह यात्रा करीब 4. नाव कैसे करते हैं? नाव के इतिहास के बारे में बताएं। Answer.


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10 Lines on Boat in Hindi। नाव पर 10 लाइन वाक्य

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ADVERTISEMENTS: नौका-यात्रा पर अनुच्छेद Paragraph on A Boat-Trip in Hindi प्रस्तावना: पिछली गर्मी छुट्टियां हमने बड़ी शान से बिताई । इस अवधि में मैने कई नगर व शहर देखे । नए-नए लोगों से मुलाकात की और मित्रता कायम की तथा अनेक अनुपम दृश्यों का आनन्द उठाया । इसी बीच गंगा पर नौका विहार करने का अवसर भी मिला । मेरा यह अनुभव एकदम अनूठा था । मैं इसे जीवनभर न भूल पाऊँगा । इस यात्रा की याद से ही मन बड़ा प्रफुल्लित हो उठता है । नौका यात्रा: हम तीन मित्र इलाहाबाद की यात्रा पर गये हुये थे । एक दिन हम लोगों ने फैसला किया कि हम लोग बनारस की यात्रा नाव से करें । हमने यात्रा का प्रबन्ध पहले से ही कर लिया और अगले दिन खूब सवेरे हम नौका-यात्रा पर निकले पड़े । कुछ देर में ही हमारी नाव पवित्र गंगा की धार पर चल निकली । धारा के बहाव की दिशा में हमारी नाव को जाना था । उस समय हवा भी उसी दिशा में चल रही थी । बिना पतवार चलाये ही नौका तेजी से मंजिल पर चल रही थी । मल्लाह पतवार ऊपर किए आराम से गप्पें लड़ा रहे थे । वे बीड़ी पीकर धुँआ उड़ाते और हंसते जा रहे थे । ठंडी-ठंडी हवा हमें मस्त बना रही थी । कुछ ही देर में हमारे दो साथी नाव में ही सो गए । प्राकृतिक दृश्य: मैं प्रकृति के दृश्यों को देखने का इतना उत्सुक था कि मेरी ऑख नहीं लगी । मैं नदी के दोनों तटों की ओर बारी-बारी से देखता । कभी सामने देखता तो कभी पीछे । समूचा दृश्य मुझे मन्त्र-मुग्ध किए हुए था । नदी के एक ओर थोड़ी-थोड़ी दूर पर पक्के घाट बने थे । यही अनेक पुरुष, रित्रयी और बच्चे स्नान कर रहे थे । कुछ दूर पर मुझे धोबी घाट दिखाई दिया । दस-बारह धोबी घुटनों तक पानी मे खड़े कपड़े पछाड़ रहे थे । जगह-जगह बालू में कुछ बच्चे भी खेलते दिखे । और आगे बढ़ने पर मुझे मटके लिए कुछ औरतें दिखाई दीं । वे नदी के किनारे पानी भरने आई थीं । नदी के दूसरी ओर मुझे खेत दिखाई दे रहे थे । जिनमें कृषक अपना-अपना काम कर रहे थे । यात्रा का आनन्द: अब तक दोपहर हो गई थी । नदी के दूसरे तट के मैदानो में मुझे कुछ पशु चरते हुए दिखाई दिए । इस समय सूरज तपने लगा था और गरमी पड़ने लगी थी । हम लोगों ने नाव पर परदा लगवा लिया । दूर पेडो की छाया में हमें कुछ बछडे और गडरिये बैठे दिखाई दिए । हमारी नाव धीरे-धीरे अपनी मंजिल की ओर बढती जा रही थी । इस समय चारों ओर सन्नाटा था । इसी बीच मुझे पानी में पड़ती सूरज की छाया दिखी । लम्बी चमकदार धारी-सी छाया देख मुझे बड़ा आनन्द आया । सूरज की किरणों से नदी का जल एकदम सुनहरा हो गया था, मानो प्रकृति ने उस पर सोने का पत्तर चढा दिया हो । ADVERTISEMENTS: आसमान लाल हो रहा था । शाम का दृश्य भी बड़ा सुहावना था । खेतो से लौटते कृषकों बैलों तथा चारागाह से लौटते पशु दिखाई दे रहे थे । कुछ लोग नदी में तैर रहे थे । अब रात हो गई । रात में नदी एकदम शान्त थी और दोनों किनारों पर भी पूर्ण निस्तब्धता छाई हुई थी । दूर टिमटिमाती रोशनी और नदी के जल में उसकी छाया बड़ा कौतुहलपूर्ण दृश्य उपस्थित कर रही थी । आसमान में चाँद चमकने लगा । चांदनी रात में नदी तट और भी सुहावना लग रहा था । इतने में दूर नदी किनारे हमें कुछ लपटे दिखाई दी । नजदीक जाने पर समझ में आया कि वही किसी की चिता जल रही है । जलती चिता को देखकर मेरा आनन्द एकदम गायब हो गया और मैं मौत के बारे में सोचने लगा । ऐसा सोचते-सोचते ही मेरी आंख लग गई और हम सभी सो गए । उपसंहार: हमें बड़ी गहरी नींद आई । एकाएक मल्लाहों की आवाज ने हमें जगा दिया । वे कह रहे थे कि बनारस आ गया है । हम हड़बड़ा कर उठे । हमे बनारस के घाट दिखने लगे थे । सवेरा हो रहा था । हमारी नाव एक घाट पर लगी और हम लोग नाव से उतर पड़े । Welcome to EssaysinHindi. . . . . .

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Essay on Nauka Bihar (Boating) in Hindi For Class 7

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