Biography of rani laxmi bai in hindi in short. Rani Laxmi Bai Biography in Hindi 2022-10-18

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रानी लक्ष्मीबाई एक ऐसी महिला थी जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपनी जान भी खतरे में डालकर भारत की स्वतंत्रता के संग्राम में अपना योगदान दिया।

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को महाराष्ट्र के जयपुर में हुआ था। उनके पिता कुंजबाई वाजपेयी थे जो कि महाराष्ट्र के राजपाल थे। रानी लक्ष्मीबाई को स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सभी विषयों से अच्छी तरह से जानकारी थी और वे अपने जीवन भर इसकी संस्थापना करने में लगी रहीं।

1857 में भारत की स्वतंत्रता संग्राम में रान

रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी Rani Laxmi bai biography in hindi essay history lines

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कालपी में भी रानी लक्ष्मीबाई और अंग्रेजों के बीच युद्ध हुआ. रानी लक्ष्मीबाई की अंतिम इच्छा थी कि उनका शव अंग्रेजों के हाथ ना लग पाए. वह झाँसी को ब्रिटिश राज्य में मिलाना चाहता था. रानी लक्ष्मी बाई की तलवार का वेट 4 फुट लम्बी और उससे सेकड़ो दुश्मनो के सिर हुए थे। 3. उनका नाम मणिकर्णिका था और उन्हें प्यार से लोग मनु बुलाते थे। ऐसा और ज्ञान पाना चाहते हैं? लेकिन नियति को यह कहाँ मंजूर था कि वह साधारण स्त्रियों की तरह वह पुत्र का सुख पाए. लेकिन हर गुजरते दिन के साथ झाँसी की रानी की प्रासंगिकता कम होने के बजाए बढ़ती हीं जा रही है. उनका विवाह प्राचीन झाँसी में स्थित गणेश मंदिर में हुआ था.


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Rani Laxmi Bai Biography

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इसलिए बाबा गंगादास ने अपनी कुटिया को हीं चिता का रूप दिया और अपनी कुटिया में में हीं उनका अग्निसंस्कार किया. उस समय तो रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी का किला छोड़ रानीमहल में चली गई, लेकिन उन्होंने अंग्रेजो से लड़ाई लड़ने का फैसला किया. रानी लक्ष्मी बाई के घोड़े का नाम सारंगी ,पवन और बादल था। 4. अंग्रेजों ने उस बच्चे को उत्तराधिकारी मानने से इंकार कर दिया. हालाँकि जब अंग्रेजो की विशाल सेना ने किले को पूरी तरह से घेर लिया तो रानी लक्ष्मीबाई कालपी चली गई. और आज भी वह करोड़ों लोगों की प्रेरणा है. वैसे तो रानी लक्ष्मीबाई को आज पूरा देश जानता है, लेकिन आज भी लोगों के मन में रानी लक्ष्मीबाई को लेकर कई तरह के सवाल है.

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रानी लक्ष्मी बाई का जीवन परिचय (जन्म, परिवार, शिक्षा, संघर्ष, विवाह, फिल्म, मृत्यु)

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क्युकी वे पुरुष पोषक में थी। उन्हें अंग्रेजी सैनिक पहचान नही पाए और उन्हें छोड़ दिया. हालाँकि पुत्र गोद लेने के अगले ही दिन 21 नवंबर 1853 को राजा गंगाधर राव का निधन हो गया. इस समय अंग्रेज सरकार झाँसी को हथियाने में कामयाब रही और अंग्रेजी सैनिकों नगर में लूट—फ़ाट भी शुरू कर दिया. ऐसे में दरबारियों ने रानी लक्ष्मीबाई को एक पुत्र गोद लेने की सलाह दी. . तब वहाँ के पेस्वा ने परिस्थिति को समझ कर उन्हें शरण दी और अपना सैन्य बल भी प्रदान किया था। 22 मई, 1858 को सर ह्यू रोज ने काल्पी पर आक्रमण कर दिया, तब रानी लक्ष्मीबाई ने वीरता और रणनीति पूर्वक उन्हें परास्त किया और अंग्रेजो को पीछे हटना पड़ा. रानी लक्ष्मीबाई का विवाह Rani Laxmibai Marriage धीरे-धीरे समय बीतता गया और जब रानी लक्ष्मीबाई 13 वर्ष की हुई तो साल 1842 में उनका विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव निवालकर के साथ बड़े ही धूम-धाम से किया गया.

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Rani Lakshmi bai Biography In Hindi (रानी लक्ष्मी बाई की जीवनी) Biography In Hindi राजा महाराजा

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वहाँ इन्होने ग्वालियर के महाराजा को परास्त किया था। और रणनीतिक तरीके से ग्वालियर के किले पर जीत हासिल की और ग्वालियर का राज्य पेश्वा को सौप दिया था। रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु — Rani Laxmi Bai Death photo of rani laxmi bai— 17 जून,1858 में किंग्स रॉयल आयरिश के खिलाफ युध्द लड़ते समय rani lakshmi bai led the revolt at ग्वालियर के पूर्व क्षेत्र का मोर्चा संभाला. रानी लक्ष्मीबाई को अस्त्र-शस्त्र चलाना बचपन से ही पसंद था. इसके अलावा और भी कि तरह के सवाल लोगों के मन में उठते हैं. इस तरह 18 जून 1858 को रानी लक्ष्मीबाई इस दुनिया को छोड़कर चली गई. यहां रानी लक्ष्मीबाई की चंचलता ने सबका मन मोह लिया था.

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Rani Laxmi Bai Biography in Hindi

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लक्ष्मी बाई की सहेली की बार करे तो वह नाना के साथ ही खेलती थी उसके अलावा बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी उनकी सहेलिया थी। 6. महज 23 की उम्र में जिस तरह से रानी लक्ष्मीबाई ने ब्रिटिश साम्राज्य के सैनिकों से लड़ाई लड़ी, उसे देखकर अंग्रेज अफसर भी हैरान रह गए. रानी लक्ष्मी बाई के बचपन का नाम मनु और मणिकर्णिका था। 5. रानी लक्ष्मीबाई महज 7 साल की उम्र में घुड़सवारी, तलवारबाजी और धनुर्विद्या में निपूर्ण हो गई थी. और झाँसी को अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाने का कार्य शुरू कर दिया.

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रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी

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विवाह करने के बाद ही मणिकर्णिका का नाम लक्ष्मीबाई रखा गया. परन्तु रानी, दामोदररावके साथ अंग्रेजों से बचने में सफल हो गयी. यह भी पढ़ें फिर: महाराष्ट्र की शान — छत्रपति शिवाजी महाराज की जीवनी महाराणा प्रताप कौन थे और क्या है महाराणा प्रताप का इतिहास? रानी लक्ष्मीबाई की अंग्रेजों से लड़ाई राजा गंगाधर राव के निधन के बाद झाँसी पर ब्रिटिश हुकूमत की नजर पड़ी. इस बीच, अंग्रेज रानी लक्ष्मीबाई के पीछे ग्वालियर भी गए। 18 जून 1858 को ग्वालियर के निकट कोटा में एक बार फिर रानी लक्ष्मीबाई और अंग्रेजों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई ने अपने दोनों हाथों में तलवार लेकर अंग्रेजी सेना से खूब युद्ध किया। इसी बीच अंग्रेजों ने रानी लक्ष्मीबाई को भाले से मार डाला, जिससे उनके शरीर से काफी पानी बहने लगा। इसके बावजूद रानी लक्ष्मीबाई युद्ध करती रहीं, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण जब वह कमजोर हो गईं तो एक अंग्रेज ने रानी लक्ष्मीबाई पर तलवार से हमला कर दिया। इससे रानी लक्ष्मीबाई बुरी तरह घायल हो गईं और घोड़े से नीचे गिर गईं। इसके बाद रानी लक्ष्मीबाई के सैनिक उन्हें पास के एक मंदिर में ले गए, जहां रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु हो गई। रानी लक्ष्मीबाई की अंतिम इच्छा थी कि उनका शरीर अंग्रेजों के हाथ न लग जाए। यही कारण है कि सैनिकों ने मंदिर के पास रानी लक्ष्मीबाई के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इस तरह 18 जून 1858 को रानी लक्ष्मीबाई इस दुनिया से चली गईं। Read More: आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी कैसे लेगी आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं ,यदि आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं. जिसके बाद रानी लक्ष्मीबाई ने पांच वर्ष के बालक को गोद लिया और उसका नाम रखा दामोदर राव. में लक्ष्मीबाई ने पुत्र को जन्म दिया.

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Rani Laxmi Bai Biography In Hindi

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पर वहाँ उनका मुकदमा ख़ारिज कर दिया गया. क्रूर अंग्रेज भी यह समझ गए थे कि बिना छल किये, वो ये लड़ाई नहीं जीत सकते हैं. लक्ष्मी बाई झांसी की रानी थी। इसके बारेमे भी पढ़िए :- Conclusion— आपको मेरा Rani Laxmi Bai Biography In Hindi बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। लेख के जरिये हमने rani laxmi bai slogan और jhansi ki rani history से सबंधीत सम्पूर्ण जानकारी दी है। अगर आपको अन्य व्यक्ति के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है। हमारे आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ शयेर जरूर करे। जय हिन्द।. इस बीच अंग्रेजो ने रानी लक्ष्मीबाई को बरछी मार दी, जिससे उनके शरीर से खूब बहने लगा. कुछ समय पश्चात् सर ह्यू रोज ने काल्पी पर फिर से हमला किया और इस बार रानी को हार का सामना करना पड़ा था। युद्ध में हारने के पश्चात् राव साहेब पेश्वा , बन्दा के नवाब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई और अन्य मुख्य योध्दा गोपालपुर में एकत्र हुए. बाद में राव इंदौर शहर में बस गये थे। और उन्होंने अपने जीवन का बहुत समय अंग्रेज सरकार को मनाने एवं अपने अधिकारों को पुनः प्राप्त करने के प्रयासों में व्यतीत किया था। उनकी मृत्यु 28 मई, 1906 को 58 वर्ष में हो गयी. यहीं कारण है कि सैनिकों ने मंदिर के पास ही रानी लक्ष्मीबाई के शव का अंतिम संस्कार कर दिया.

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Biography of Rani Laxmi

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कालपी में रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे से मिली. उसने महाराज की मृत्यु का फायदा उठाने की कोशिश की. सन 1851 में उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम दामोदर राव रखा गया, परन्तु दुर्भाग्यवश वह मात्र 4 मास ही जीवित रह सका था ऐसा कहा जाता हैं कि महाराज गंगाधर राव नेवालकर अपने पुत्र की मृत्यु से कभी उभर ही नही पाए और सन 1853 में महाराज बहुत बीमार पड़ गये, तब उन दोनों ने मिलकर अपने रिश्तेदार महाराज गंगाधर राव के भाई के पुत्र को गोद लेना निश्चित किया। इस प्रकार गोद लिए गये पुत्र के उत्तराधिकार पर ब्रिटिश सरकार कोई आपत्ति न ले, इसलिए यह कार्य ब्रिटिश अफसरों की उपस्थिति में पूर्ण किया गया. इसके बाद रानी लक्ष्मीबाई के सैनिक उन्हें पास के एक मंदिर में ले गए, जहाँ रानी लक्ष्मीबाई का निधन हो गया. उन्होंंने नाना को टोकते हुए कहा कि वह हाथी की सवारी करना चाहती हैं। इस पर नाना ने उन्हें सीधे इनकार कर दिया। उनका मानना था कि मनु हाथी की सैर करने के योग्य नहीं हैं.

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